शिक्षिका की डायरी

रेखा चमोली

9-08-11

कक्षा 4 व 5 के साथ बातचीत करने का स्पष्ट प्रभाव कक्षा 3 पर दिख रहा है। इस बीच संजय जो अनियमित रूप से विद्यालय आता है, सक्रिय दिख रहा था। उसका व्यावहारिक ज्ञान व कल्पनाशीलता बेजोड़ है। कक्षा 3 में आए बच्चे कक्षा 1 से ही मेरे साथ हैं इसलिए पूर्व में किए कार्यों का प्रभाव इनके रचनात्मक लेखन को सहज, रोचक बना रहा है पर कक्षा तीन-चार-पाँच के साथ एक ही गतिविधि को आधार बनाकर कोई खास काम करना थोड़ा कठिन है। कक्षा तीन के बच्चों के पढ़ने व लिखने के कौशल कक्षा चार व पाँच के मुकाबले कम हैं। इस काम में तुरन्त कापियाँ देखनी पड़ती है, प्रतिदिन काम सुद्ध करना पड़ता है ताकि हम समय पर अपनी किताबें बना पाएँ, इसलिए आज से कक्षा 4 व 5 के साथ ही ये काम करना तय किया। कक्षा तीन के बच्चे अन्य कार्य करेंगे।

सबसे पहले हमने बडे़ गोले में बैठकर अपनी पिछले दिन लिखी कहानियाँ साझा की। इसके बाद मैंने बच्चों से कहा, वे अपने किसी एक दिन की कोई बात बताएँ जिस दिन उन्हें खूब मजा आया हो या घर में किसी बात पर डाँट पड़ी हो या स्कूल में कुछ खास हुआ हो, दोस्त की मदद की हो, घूमने गए हों। एक ऐसा दिन जो बार-बार याद आता है। भुलाए से नहीं भूलता। मैंने बच्चों को अपनी बचपन की एक घटना सुनाई जिसमें मैं अमरूद तोड़ने की कोशिश में नाले में गिर पड़ी थी। बच्चों ने कुछ देर सोचा फिर अपने अनुभव सुनाने लगे। मैं एक किनारे पर बैठी सब सुनती रही।
(Diary by Rekha Chamoli)

बच्चों के पास ढेरों अनुभव होते हैं जिन्हें वे मौका मिलते ही दूसरों से साझा करना चाहते हैं। अपनी बात बताते हुए वे वाक्यों को क्रम से लगा रहे होते हैं। कई बार वे इसमें नयी बातें भी जोड़ते हैं। जब वे अपनी बात को लिखते हैं तो समझ के साथ लिखना सीखते हैं। उन्हें अपने लिखे हुए से लगाव होता है। उनमें दूसरों की बात सुनने का कौशल भी विकसित होता है। सबसे बड़ी बात यह कि उन्हें अपनी कक्षा बेगानी नहीं लगती। जब हम बच्चों के निजी अनुभवों को कक्षा में जगह दे रहे होते हैं तो हम उनके अस्तित्व को स्वीकार कर रहे होते हैं। उनके आगे बढ़ने में जाने-अनजाने में उनकी सीखी चीजों की मदद ले रहे होते हैं। जो मनुष्य के सीखने के सबसे पुराने व पारंपरिक तरीकों में से एक है।
कुछ अनुभव इस तरह से थे-
1. राहुल, कक्षा 5, बाघ की बात

एक दिन रात जब मैं सो रहा था, अचानक मुझे सीटी की आवाज सुनाई दी। दूर जंगल में कोई सीटी बजा रहा था। मैं उठ गया और अपने पापा के साथ बाहर आया। कुछ लोग जंगल की तरफ दौड रहे थे। पापा ने बताया जंगल में कोई मुसीबत में है। पापा ने मुझे अंदर जाने को कहा। पापा और लोगों के साथ जंगल की तरफ दौड पडे़। पापा बहुत देर बाद आये। मैं इतनी देर सो नहीं सका। उन्होंने बताया, जंगल में किशन चाचा की भेड़ पर बाघ ने हमला कर दिया था। इसीलिए उन्होंने सीटी बजाकर लोगों को मदद के लिए बुलाया। जब सब लोग गए तो बाघ डरकर भाग गया फिर भी उसने एक भेड़ मार दी लेकिन बाकी भेडे़ं बच गईं।
(Diary by Rekha Chamoli)
2. आयुषी, कक्षा 5, गाड़ में नहाने की बात

एक बार मैं गाड़ (छोटी नदी) में नहाने गयी। मेरे साथ मेरी एक दोस्त भी थी। मैं नहाने गयी। मैं थोड़ा बीच में चली गयी। मैं वहाँ पर डूबने लगी फिर मैं किनारे पर नहाने लगी। मैंने छलाँग मारी ओर मैं आधी गाड़ तक बही। मैंने अपने भैया को आवाज दी। भैया ने मुझे पकड़ लिया। मुझे बीच गाड़ में जाने से मना किया। फिर मैंने कपडे़ पहने और घर चली गयी।
3. निकिता, कक्षा 4, एक दिन की बात

मैं एक दिन सुबह उठी। मैंने हाथ-मुँह धोया और नाश्ता खाया। फिर मैं स्कूल आयी। स्कूल में मैंने पढ़ाई की। जब हमारी छुट्टी हुई तो मैं घर आयी। मैंने खाना खाया फिर मैं सो गई, थोड़ी देर में मैं उठ गई। फिर मेरी माँ नौगाँव गई। मैंने अपने भाई को अपने साथ रखा। थोड़ी देर में मैंने उसे खेलने को छोड़ दिया। वह अकेले नौगाँव चला गया। मेरी माँ उसे अकेला नौगांव में देखकर हैरान हो गयी। फिर मेरी माँ उसे नौगांव से अपने साथ लायी। मेरी माँ ने मुझे बहुत मारा। मैं रोने लगी। मेरी दीदी ने मुझे बचाया फिर मैं चुप हो गयी। थोड़ी देर में मैं दूध देने चली गयी। फिर घर आयी। मैंने हाथ मुँह धोकर देवता की पूजा की और पढ़ाई करने लगी। खाना खाने के बाद मैं सो गयी।
4. प्रिया, कक्षा 5, गौशाला टूट गयी

एक दिन बहुत जोर से बारिश हुई। एक गौशाला टूट गयी। गौशाला के दरवाजे तक मिट्टी आ गयी। सुबह जब गाय की मालकिन दूध निकालने गयी तब उसको यह बात पता चली। सबने मिलकर मलबा उठाया और गाय को बाहर निकाला। गाय को दूसरी गौशाला में ले गए। बारिश से बहुत सारी गौशालाएँ टूट गयी थीं।
(Diary by Rekha Chamoli)
5. हर्ष, कक्षा 5,  जब मैं जंगल गया

हमारे गांव के जंगल में बहुत सारे पेड़ और जानवर हैं। वह बहुत घना जंगल है। लोग जब उसमें घास और लकड़ी लेने जाते हैं तो झाड़ियों में अटक जाते हैं। जंगल के रास्ते उबड़-खाबड़ और पेड़ों से घिरे हैं। एक दिन मैं अपनी माँ के साथ जंगल में घास लेने गया। माँ ने घास काटी। मैंने घास एक जगह पर इकठ्ठी की। मुझे जंगल में तरह-तरह की आवाजें सुनाई दी। मैं डरने लगा। माँ ने कहा डरने की कोई बात नहीं है। फिर हम घास लेकर वापस आ गए। जंगल में मैंने आंवले भी खाए। हमें घर आने में देर हो गयी थी। आधे रास्ते तक मेरा भाई मुझे लेने आया।
6. आस्था, कक्षा 5, मेरी कहानी

एक दिन की बात है। मैं स्कूल जा रही थी। अचानक बहुत तेज बारिश हो गयी। मैं भीग गयी। मैडम भी भीग गयी थी। मैडम ने पूछा आस्था तुम इतना कहां भीगी। मैंने कहा मैं स्कूल आने में भीग गयी । तब अमोल ने आग जलायी। और हमने आग से अपने कपडे़ सुखाये। फिर हम अंदर गये और पढ़ाई की फिर खाना खाया। खेले फिर गणित पढ़ा। उसके बाद हमारी छुट्टी हुई। रास्ते में मुझे एक घायल चिड़िया मिली। उसका पंख टूटा हुआ था। मैं उसे अपने घर ले गयी। उसे पानी पिलाया। थोड़ी देर बाद वह उड़ गयी।
(Diary by Rekha Chamoli)
7. हिमांशु, कक्षा 4   

एक दिन मैंने अपने चाचा के साथ जंगल गया। माँ ने चाचा से कहा इसे अकेला मत छोड़ना। मैंने अपने चाचा के साथ लकड़ी जमा की। वहां मुझे दूर पत्थर पर एक आदमी दिखायी दिया। फिर हम लकड़ी लेकर घर आ गए। हमें भूख लगी थी। माँ ने हमें खाना दिया। फिर मैं सो गया।
8. वैशाली, कक्षा 5, एक दिन मैं खेत में गयी

एक दिन मैं अपनी माँ के साथ खेत में गई थी। हम खेत में पहुंचे। वहां बहुत से बंदर आये थे। माँ ने बन्दरों को भगाने के लिए पत्थर फेंके। बन्दर जोर से खौं-खौं करके हमें डराने लगे। तब माँ ने खेत के पास पड़ा एक बड़ा डण्डा उठाकर उन्हें डराया। बन्दर पेड़ पर चढ़ गए। वह दूर से हमें डरा रहे थे। माँ ने कहा अब वे वापस नही आएंगे। माँ दिन भर खेत में गुड़ाई करती रही। मैं माँ के लिए पेड़ की जड़ के पास से ठंडा पानी लायी। थोड़ी देर बाद हमने रोटी खायी। 
(Diary by Rekha Chamoli)
9. प्रकाश,  कक्षा 5

एक रात की बात है। गाँव  के कुत्ते जोर-जोर से भौंक रहे थे। लोगों ने बाहर आकर देखा कि अचानक जंगल से बाघ आया था। एक आदमी किनारे था। बाघ उसे खाने को आगे बढ़ा। वह आदमी भागा। वह पेड़ से टकराया और गिर गया। वह फिर भागा। और एक पेड़ पर चढ़ गया। पेड़ पर बहुत सारे कीड़े थे। उन्होंने उसे काटा। उसके पैर में कांटा भी चुभ गया। जब बाघ चला गया वो पेड़ से उतरा और अपने घर गया।

बच्चों के अनुभव पढ़कर मुझे लगा इनकी दुनिया कितनी बड़ी है। कितनी सारी चीजें है जो बच्चों के मन पर अपनी अमिट छाप छोड़ देती हैं। वे अपने व्यावहारिक जीवन से कितना कुछ सीखते है। वे अपनी बात कहने को कितने उत्सुक होते हैं। अपनी बात कहने के दौरान वे किसी घटना का सूक्ष्मता से वर्णन करते हैं और उस घटना के सभी पहलुओं पर विस्तार से बातचीत करना चाहते हैं। साथ ही अपनी बात का कोई न कोई निष्कर्ष भी निकालना चाहते हैं। बच्चों ने जितना लिखा, वह उनकी कही बात से कम था इसका अर्थ यह था कि बच्चे अपनी बात को सुगठित रूप से लिखने का प्रयास कर रहे थे।

आज विद्यालय में जगमोहन चोपता भी आए थे। उन्होंने हमारी रचनात्मक कक्षा की गतिविधियां देखी। बच्चों से बातचीत की। बच्चों ने अपनी किताब के तैयार पेज उन्हें दिखाए व अपने काम के बारे में बताया। उन्होंने बाल पत्रिका बनाने को लेकर कुछ सुझाव भी दिए। कई बार लगता है कि एक जैसी समझ रखने वाले लोगों का आपस में बात करना काम को थोड़ा व्यवस्थित बना देता है। साथ ही अपने काम को आलोचनात्मक तरीके से देखने में भी मदद मिलती है।
क्रमश:
(Diary by Rekha Chamoli)

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